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साई  राम …

ॐ साईं राम …

 

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बांध लें ऐसे धागे से …

बांध लें ऐसे धागे से
संग कभी ये टूटे ना
चाहे हो कितनी भी
दूरियां
साथ तेरा कभी छुटे ना
लम्हा लम्हा
इंतज़ार तेरा
पल पल दिल ये
बेक़रार मेरा
गुज़रते हैं दिन
बस गुज़र जाते हैं
हम कही तुझमे
ठहर जाते हैं
वो बेसबरी
तुझसे मिलने की
वो आरज़ू
खो जाऊँ तुझमे
है ऐसी ज़ुस्तज़ू
तमन्ना कई
दिल मे लिए बैठी हूँ
सोच जरा
तुझ बिन मैं कैसी हूँ
ऐ काश की ये
वक़्त यही थम जाए
तुझे भी हमसे मिलने की
हसरत हो जाये
वो जज्बात
कुछ इस कदर
बस बह जाए
तेरी आँखों मे
देखते रहे और
वो हसीं रात गुज़र जाए …

उनका आना और यूँ ठहर जाना…

उनका आना और यूँ ठहर जाना
जैसे मेरी धड़कनो का थम जाना
उनका ये भोलापन
उनकी ये मासूमियत
उनकी इस सादगी में
मेरे हर एहसासों का
निःशब्द हो जाना
ना कुछ कह पाना
ना कुछ समझ पाना
बस उन्हें सुनते जाना
उनकी शरारती बातो में
हमारा यूँ खो जाना
यूँ ही ठहर जाए काश ये लम्हा
ना वो कुछ कह पाये
ना हम कुछ सुन पाये
देखते रहे वो चांद में हमें
हम बादलों की तरह
बूंद बन कर उनपर बरस जाए…

तमन्ना…

तमन्ना बस इतनी सी है

जब भी मिले तू ही मिले

चाहे जहान मिले ना मिले

चाहे चंद खुशियाँ मिले

हो ज़िन्दगी तुझपर शुरू

तुझपर ही शाम आकर रुके

मेरी निगाहों में हरपल तू बसे

तुझपर ही आखिरी सांस थमे…

हमने जुर्रत करली…

puchne lage sab kyo aansuo se mohabbat kar li,

keh diya has kar ye humne,

samajh sake na hum dillagi unki,

khuli aankho se khwaab dekhne ki humne jurrat kar li…

पूछने लगे सब

क्यों आंसुओ से मोहब्बत कर ली

कह दिया हस कर हमने

समझ सके न हम दिल्लगी उनकी

खुली आँखों से ख्वाब देखने की हमने जुर्रत करली…